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🔶🔶🔶जीवन🔶🔶🔶

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🔶🔶🔶जीवन🔶🔶🔶

जीवन ऐक बहती धारा
कहा था इसका किनारा —-
किसिने ये ना जाना
इसके बिना नहीं था गुजारा //

जीवन ऐक बहती धारा
मन में था कितना अंधियारा —–
धुंडता था ये सहारा
कही तो मिलेगा उजीयारा //

जीवन ऐक बहती धारा
सागर से कितना गहरा——
इसके बिना सब अधूरा
इंसान फिरता मारा मारा //

जिवन ऐक बहती धारा
संघर्ष से भरा संसार सारा —–
ना ये तेरा ना ये मेरा
फिर भी है कितना प्यारा //

🏵️🟡🟢सौ. वैजयंती विकास गहूकर योगा टीचर
चंद्रपूरvaijugahukar@gmail.com🏵️🟫 संकलन 🟪🏵️-उज्वला निमगडे दुर्गापूर-चंद्रपूर