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#Ghugus •घुग्घुस के ऐतिहासिक तालाब पर अवैध भराव का गंभीर मामला • (भाजपा) गटनेता नगरसेविका सौ.मीना चांद मोरपाका गंभीर आरोप

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•घुग्घुस के ऐतिहासिक तालाब पर अवैध भराव का गंभीर मामला

• (भाजपा) गटनेता नगरसेविका सौ.मीना चांद मोरपाका गंभीर आरोप

सुवर्ण भारत : पंकज रामटेके सहाय्यक जिल्हा प्रतिनिधी, चंद्रपूर

घुग्घुस : शहर के मार्केट लाइन क्षेत्र में स्थित लगभग 100 वर्ष से अधिक पुराने ऐतिहासिक तालाब को अवैध रूप से मिट्टी और मलबा डालकर भरा जा रहा है। यह मामला सामने आते ही क्षेत्र में चिंता का माहौल बन गया है। घुग्घुस नगर परिषद की गटनेता (भाजपा) नगरसेविका सौ. मीना चांद मोरपाका ने इस गंभीर विषय पर जिलाधिकारी, चंद्रपुर को विस्तृत ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

ऐतिहासिक और पर्यावरणीय महत्व

उक्त तालाब शहर का एक प्राचीन और महत्वपूर्ण जलस्रोत माना जाता है। वर्षों से यह तालाब न केवल वर्षाजल संचयन का कार्य करता रहा है, बल्कि आसपास के नागरिकों, पशुओं तथा छोटे व्यवसायों के लिए भी जीवनरेखा साबित हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह तालाब शहर की पहचान और पर्यावरणीय धरोहर का हिस्सा है।

अवैध भराव से बढ़ता खतरा

नगरसेविका मोरपाका ने आरोप लगाया है कि तालाब के मालिक द्वारा निजी स्वार्थ के चलते सुनियोजित तरीके से मिट्टी और मलबा डालकर तालाब को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। अब तक सैकड़ों वर्गफुट क्षेत्र में भराव किया जा चुका है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो पूरा जलस्रोत नष्ट हो सकता है।

संभावित दुष्परिणाम

तालाब के समाप्त होने से शहर को कई गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं—

* भूजल स्तर में भारी गिरावट, जिससे भविष्य में पेयजल संकट गहरा सकता है।
* गणेश एवं देवी प्रतिमा विसर्जन के लिए वैकल्पिक स्थान की समस्या।
* सिंघाड़ा उत्पादन तथा अन्य जल-आधारित आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव।
* गाय-भैंस सहित अन्य पशुओं के लिए पानी की कमी।
* पर्यावरण संतुलन और वर्षाजल संचयन व्यवस्था पर नकारात्मक असर।
* बरसात के समय जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति की संभावना में वृद्धि।

प्रशासनिक अनदेखी का आरोप

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व में कई नागरिकों ने संबंधित विभागों से तालाब के गहरीकरण, सौंदर्यीकरण और संरक्षण की मांग की थी। डिजिटल माध्यमों और लिखित निवेदनों के बावजूद प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी लापरवाही का लाभ उठाकर अवैध भराव कार्य जारी रखा गया है।

कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग

सौ. मीना चांद मोरपाका ने महाराष्ट्र नगर पालिका अधिनियम, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 तथा जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1974 सहित केंद्र और राज्य शासन के जलस्रोत संरक्षण संबंधी प्रावधानों के अंतर्गत तत्काल स्थल निरीक्षण कराने की मांग की है।

उन्होंने मांग की है कि—

* अवैध भराव कार्य को तुरंत प्रभाव से रोका जाए।
* यथास्थिति बनाए रखने के आदेश जारी किए जाएं।
* लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों, अभियंताओं और तालाब मालिक के विरुद्ध विधिसम्मत दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
* तालाब को सार्वजनिक जलस्रोत घोषित कर उसका संरक्षण, पुनर्जीवन (रिवाइवल) और सौंदर्यीकरण शासन स्तर पर कराया जाए।

जनभावनाओं से जुड़ा मुद्दा

नगरसेविका ने अपने ज्ञापन में कहा है कि यह केवल एक तालाब का मामला नहीं, बल्कि शहर के पर्यावरण, जल सुरक्षा और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा विषय है। स्थानीय नागरिकों की भावनाएं इस जलस्रोत से गहराई से जुड़ी हैं। यदि प्रशासन समय रहते कठोर कदम नहीं उठाता है तो भविष्य में स्थिति गंभीर हो सकती है।

उन्होंने जिला प्रशासन से अपील की है कि जनहित और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए इस मामले में तत्काल, निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि शहर की इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाया जा सके।