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पळसगांव वनक्षेत्र में उपप्रौढ़ बाघ (T-202F S2)की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग, वी केयर फाउंडेशन ने सरकार को सौंपा ज्ञापन

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पळसगांव वनक्षेत्र में उपप्रौढ़ बाघ (T-202F S2)की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग, वी केयर फाउंडेशन ने सरकार को सौंपा ज्ञापन

चंद्रपुर, 27 जुलाई। ताडोबा-अंधारी व्याघ्र परियोजना के पळसगांव वनक्षेत्र में रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान (T-202F S2) नामक उपप्रौढ़ बाघ की हुई मौत के मामले में वी केयर फाउंडेशन, चंद्रपुर ने राज्य सरकार और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है।

फाउंडेशन के अध्यक्ष हिमायूँ इस्राइल अली द्वारा दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि 14 जुलाई 2026 को पळसगांव वनक्षेत्र में (T-202F S2) नामक उपप्रौढ़ बाघ को रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बेहोश कर पकड़ने की कार्रवाई की जा रही थी। इसी दौरान बाघ की मृत्यु हो गई। वन विभाग के अनुसार, बाघ की मौत रेस्क्यू प्रक्रिया के दौरान हुई, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम की पारदर्शी जांच आवश्यक है।

ज्ञापन में कहा गया है कि बाघ भारत का राष्ट्रीय पशु है और वह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित वन्यजीव है। ऐसे में रेस्क्यू अभियान के दौरान उसकी मृत्यु होना गंभीर चिंता का विषय है तथा यह जांच होना जरूरी है कि पूरी कार्रवाई निर्धारित नियमों और वैज्ञानिक मानकों के अनुसार की गई थी या नहीं।

ज्ञापन में प्रमुख मांगें

रेस्क्यू ऑपरेशन की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।

बाघ को बेहोश करने के लिए उपयोग की गई दवा, उसकी मात्रा तथा पूरी चिकित्सकीय प्रक्रिया की जांच की जाए।

रेस्क्यू अभियान में शामिल वन अधिकारियों, पशु चिकित्सकों, रेस्क्यू टीम एवं अन्य कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाए।

पोस्टमार्टम एवं फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट का वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाए।

यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधितों के विरुद्ध विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए।

भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए रेस्क्यू प्रक्रिया में आवश्यक सुधार लागू किए जाएं।

फाउंडेशन ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य किसी अधिकारी या कर्मचारी को पूर्वाग्रह के आधार पर दोषी ठहराना नहीं है, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तथ्यों को सामने लाना तथा भविष्य में वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

यह ज्ञापन मुख्यमंत्री, वन मंत्री, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), ताडोबा-अंधारी व्याघ्र परियोजना के क्षेत्र संचालक तथा अन्य वरिष्ठ वन अधिकारियों को संबोधित किया गया है। फाउंडेशन ने जनहित एवं वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से मामले की शीघ्र जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
ज्ञापन देते समय वी केयर फाउंडेशन के सदस्य हाजी अली,चन्द्रकिशोर यादव,मंसूर कुरैशी,शिल्पा कांबळे, मोहम्मद समीर, उपस्थिति थी